7 फ़रवरी 2021 - 15:30
जो बाइडन ने अपने पहले ही भाषण में सऊदी अरब को दिया बेहद कठोर पैग़ाम, इमारात ने रियाज़ से दूरी क्यों बना ली? क्या सऊदी अरब में क़ैद कार्यकर्ताओं की रिहाई क़रीब है?

अमरीका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने गुरुवार को अपने भाषण से नई बहस छेड़ दी है। इस भाषण में उन्होंने विदेश नीति पर बात की और ख़ास तौर पर मध्यपूर्व के मुद्दे को उठाया। उन्होंने लोकतंत्र और मानवाधिकार का मुद्दा उठाया जो अरब सरकारों की दुखती रग दबाने के समान है।

बाइडन ने कहा कि यमन युद्ध में सऊदी अरब के सैनिक एलायंस का समर्थन बंद किया जाएगा और सऊदी अरब को हथियारों की बिक्री के मुद्दे पर पुनरविचार किया जाएगा। बाइडन ने छह साल से जारी यमन युद्ध को मानव त्रासदी कहा जिसे तत्काल समाप्त होना चाहिए।

दो पक्षों ने इस भाषण का जमकर स्वागत किया और बड़ी उम्मीदें लगा लीं।

एक पक्ष यमन की 3 करोड़ जनता है जो बड़ी कठोर नाकाबंदी झेल रही है और जहां 80 प्रतिशत आबादी भुखमरी से बचने के लिए मानवीय सहायताओं पर निर्भर है।

दूसरा पक्ष उन राजनैतिक व सामाजिक कार्यकर्ताओं का हो जो सऊदी अरब की जेलों में कई कई साल से बंद हैं। सऊदी अरब ने आनन फ़ानन में अमरीकी नागरिकता रखने वाले दो क़ैदियों को रिहा कर दिया जिन्हें आतंकवाद के आरोप में जेल में रखा गया था। मिस्र की सरकार ने अलजज़ीरा टीवी चैनल के पत्रकार को रिहा कर दिया। हो सकता है कि बहुत जल्द सऊदी अरब में कुछ अन्य कार्यकर्ता और राजकुमार भी रिहा कर दिए जाएं।

हथियार के सौदे जिनकी क़ीमत सैकड़ों अरब डालर बताई जाती है, इसी तरह इस्राईल से अरब सरकारों के समझौते अब अमरीका की नई सरकार की प्राथमिकता नहीं रह गए हैं। यह सरकार ट्रम्प द्वारा विदेश नीति को पहुंचाए गए गहरे आघात पर मरहम लगाने की कोशिश कर रही है।

ट्रम्प सरकार ने यमन युद्ध का समर्थन करने के बदले सऊदी अरब और फ़ार्स खाड़ी के अन्य अरब देशों से लगभग एक ट्रिलियन डालर की रक़म वसूली और इन सरकारों को यह जताया कि ईरान के ख़तरे से उनकी रक्षा की जा रही है और इन सरकारों के हाथों मानवाधिकारों के गंभीर हनन को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। लगता है कि बाइडन सरकार इस बुरी विरासत से छुटकारा पाना चाहती है।

यमन के मामले में अगर बाइडन सरकार अपनी नीति बदल रही है तो यह यमनियों से उनकी हमदर्दी की वजह से नहीं बल्कि यमन की जनता के प्रतिरोध का नतीजा है। यमनी सेना और स्वयंसेवी फ़ोर्सेज़ ने अपनी रक्षा करने के साथ ही सऊदी अरब पर ज़ोरदार हमले किए हैं।

हमें नहीं मालूम कि आने वाले महीनों में बाइडन सरकार यमन में क्या व्यवहारिक क़दम उठाएगी। फ़िलहाल तो उसने हमला करने वाले देशों को हथियारों की बिक्री रोकी है और यमन के मामले में तिमोथी लिंडर किंग को विशेष दूत नियुक्त कर दिया है। हो सकता है कि जल्द ही बाइडन सरकार यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन या हूती संगठन को आतंकी संगठनों की सूचि में रखने के ट्रम्प के फ़ैसले को बदल दे।

हम अपने यमनी भाइयों को यह नसीहत करना चाहते हैं कि वह अमरीकी सरकार से ज़्यादा आस लगाने की ग़लती न करें। क्योंकि यमन युद्ध बाराक ओबामा सरकार के आख़िरी महीनों में शुरू हुआ था। तो अब अमरीकी सरकार भरोसे के लायक़ नहीं रह गई है।

यमन को चाहिए कि ईरान से वार्ता की महारत सीखे और देखे कि किस तरह ईरान ने अमरीकी सरकार का डटकर मुक़ाबला किया है। जब अमरीका वार्ता की मेज़ पर लौटने की बात कर रहा था तो ईरान ने आधुनिक सेंट्रीफ़्यूज मशीनें स्थापित कीं और यूरेनियम संवर्धन का स्तर 20 प्रतिशत तक पहुंचा दिया। यानी वार्ता में अपनी स्थिति काफ़ी मज़बूत कर ली। ईरान ने साफ़ शब्दों में कहा है कि वह परमाणु समझौते का पूरी तरह पालन तभी दोबारा शुरू करेगा जब अमरीका ईरान पर लगे प्रतिबंध समाप्त करे। ईरान ने यह भी कहा है कि परमाणु समझौते की विषयवस्तु में कोई बदलाव नहीं होगा और न ही परमाणु वार्ता में किसी नए पक्ष को शामिल किया जाएगा।

हमें नहीं लगता कि ईरान का परमाणु मामला निपटने से पहले यमन युद्ध बंद हो पाएगा या सीरिया में शांति बहाल हो पाएगी, इसी तरह फ़िलिस्तीन संकट का न्यायपूर्ण समाधान भी उस समय तक संभव नहीं है। पश्चिमी एशिया के इलाक़े के यह सारे संकट एक दूसरे से नत्थी हैं। हमें यह भी मालूम है कि दुनिया बदल रही है और विश्व मंच पर नई बड़ी शक्तियां उभरी हैं।

छह साल पहले यमन पर युद्ध थोप देने का फ़ैसला सरासर ग़लत था। यह युद्ध तत्काल रोका जाना चाहिए। इमारात ने हालात को जल्दी समझ लिया है। इसी लिए उसने बाइडन के भाषण के कुछ ही मिनट बाद एलान कर दिया कि उसने यमन से अपने सैनिक निकाल लिए हैं और अकतूबर 2019 में ही यमन युद्ध में हस्तक्षेप रोक दिया है।

बेशक बाइडन ने अपने भाषण में सऊदी अरब का समर्थन करने की बात भी कही लेकिन हमें मालूम है कि यह दिल बहलाने वाली बात है और अगर अमरीका कोई समर्थन करेगा तो उसकी क़ीमत भी ज़रूर वसूल लेगा।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार